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Thursday, March 5, 2020

अपने परिवार की कंपनी से दूर होना कितना मुश्किल?

एसेक्स के जॉर्डन बेकर बड़े होकर अपने परिवार की टेक्नोलॉजी लॉजिस्टिक कंपनी के प्रमुख बनते. उन्होंने 12 साल की उम्र में काम करना शुरू कर दिया था. वह फ़र्श साफ़ करते, फ़ोन कॉल के जवाब देते और पिता के साथ बिज़नेस के गुर सीखते.

लेकिन 2008 में 20 साल की उम्र में बेकर ने कंपनी छोड़ दी. वह कहते हैं, "आसान नहीं होता जब आपके पिता सिर्फ़ पिता नहीं, बल्कि बॉस भी हों."

"किसी निजी वजह से पिता नाराज़ हो सकते हैं जिसका असर पेशेवर माहौल पर पड़ता है. यह असहज करने वाली स्थिति होती है."

परिवार जटिल हो सकते हैं और जब आप परिवार के साथ काम करते हैं तो वह और भी जटिल हो सकता है.

बेहतरीन हालात में पारिवारिक कंपनियों में बदलाव, विस्तार और कंपनी के आदर्शों का संरक्षण आसान होता है, जैसा कि जापान की होशी रयोकन ने साबित किया है. 46 पीढ़ियों से एक ही परिवार इस कंपनी को चला रहा है.

रिटेल जायंट वॉलमार्ट समस्याओं से अछूता नहीं है लेकिन आज भी संस्थापक सैम वॉल्टन के वंशज क़रीब 50 फ़ीसदी हिस्से के मालिक हैं. परिवार में कोई विवाद हो भी तो ख़बरों में नहीं आ पाता.

फिर भी कई हाई-प्रोफ़ाइल उदाहरण हैं जहां रिश्ते ख़राब हुए. परिवार में विवाद के कारण ही स्पोर्ट्सवेयर के दो मशहूर ब्रांड- प्यूमा और एडिडास का जन्म हुआ.

सैमसंग में परिवार का झगड़ा और विरासत का संकट हुआ. ऑस्ट्रेलिया की अरबपति खनन कारोबारी गिना राइनहार्ट ने अपने परिजनों के ख़िलाफ़ क़ानूनी लड़ाई लड़ी.

हाल में ही प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल ब्रिटेन के शाही परिवार की वरिष्ठ सदस्यता से अलग हुए तो अनगिनत सुर्ख़ियां बनीं.

शाही परिवार से उनका अलगाव दूसरी कहानियों से ज़्यादा दिलचस्प हो सकता है, लेकिन पारिवारिक कंपनियों से अलग होकर नई राह पर चलना कोई नई बात नहीं है.

यह मुश्किल फ़ैसला होता है, क्योंकि वहां भावनात्मक मुद्दे जुड़े होते हैं. तो वह क्या चीज़ है जो लोगों को ऐसा करने के लिए प्रेरित करती है और क्या अलग होने का कोई 'अच्छा' तरीक़ा है?

तनाव और होड़
दुनिया भर की दो-तिहाई कंपनियां परिवार में चलती हैं. उनमें काम करने के कई फ़ायदे हो सकते हैं, लेकिन शिकागो की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर जेनिफ़र एम. पेंडरगास्ट इन कंपनियों को तनाव बिंदुओं पर ध्यान देने की सलाह देती हैं.

"सभी चाहते हैं कि वे आपके कारोबार को जानें. यदि आपके पास कोई तर्क है तो मुमकिन है कि परिवार के बाक़ी लोगों को उसके बारे में पता हो और वे (समर्थन या विरोध) पक्ष लें. कल्पना कीजिए कि आप घर जाते हैं और आपके बॉस डिनर टेबल पर बैठे मिलते हैं."

2014 की फ़ैमिली बिज़नेस सर्वे रिपोर्ट में प्राइसवाटरहाउस कूपर्स ने लिखा था कि रिश्तों के साथ काम करना विश्वास और प्रतिबद्धता का उच्च स्तर पैदा कर सकता है.

लेकिन यह तनाव, नाराज़गी और खुले संघर्ष की ओर भी ले जा सकता है, क्योंकि लोगों को दिल और दिमाग़ अलग रखने और कारोबार एवं परिवार दोनों को सफल बनाने में मुश्किल होती है.

ऑस्ट्रेलिया में 70 फ़ीसदी कंपनियां परिवार के स्वामित्व में हैं. लेखा कंपनी KPMG ने पाया कि उनमें झगड़े के मुख्य कारण हैं- संचार शैली, भविष्य की रणनीति और परिवार और बिजनेस की ज़रूरतों के बीच संतुलन.

समस्या क्षेत्रों के प्रति पीढ़ियों के नज़रिये अलग हैं. जैसे- भविष्य में बिजनेस संभालने वाले 21.8 फ़ीसदी लोगों का मानना है कि संचार शैली झगड़े का मुख्य कारण है. लेकिन अभी नेतृत्व संभाल रहे सिर्फ़ 13.3 फ़ीसदी लोग ऐसा मानते है.

पीढ़ियों के बीच के मसलों के अन्य प्रभाव हो सकते हैं. पेंडरगास्ट का कहना है कि बचपन की चीज़ों से निकल पाना आसान नहीं होता. आप वैसे ग़लतियों से आगे नहीं बढ़ पाते जिनको लोग हमेशा याद रखते हैं.

सगे भाई-बहनों में अक्सर तुलना की जाती है, जबकि चचेरे-ममेरे भाई-बहनों में ऐसा नहीं होता.

जेरेमी वाउड ने ओसीएस ग्रुप में 20 साल तक काम किया. इस फ़ैसिलिटी मैनेजमेंट कंपनी को उनके परदादा फ्रेडरिक गुडलाइफ़ ने शुरू किया था. वाउड ने इसे छोड़कर एक प्रतिद्वंद्वी कंपनी बनाई.

"मैं कंपनी के फ़ैसिलिटी मैनेजमेंट का मैनेजिंग डायरेक्टर था. वहां कुछ पुनर्गठन होने वाला था. ऐसा लग रहा था कि मेरे ज़िम्मे का काम भविष्य की योजना में फिट नहीं होने वाला था, इसलिए मैंने अलग होने का फ़ैसला किया."

वाउड का कहना है कि परिवार के कई सदस्यों के शामिल होने का मतलब था कि सतह के नीचे तनाव अक्सर बुलबुलाती रहती थी.

"एक समय परिवार के 15 लोग उस बिज़नेस में थे- चाचा, चचेरे भाई-बहन, भाई... बड़े परिवार के तनाव और प्रतिद्वंद्विता से आपका सामना होता है. शेयरहोल्डिंग की राजनीति होती है और देखना होता है कि सत्ता कहां निहित है."

सन् 2000 में जब उन्होंने अपनी फ़ैसिलिटी मैनेजमेंट कंपनी इन्सेन्टिव एफ़एम लॉन्च की तो नाराज़ परिवार वाले कोर्ट चले गए. वाउड पर ग्राहकों को तोड़ने के आरोप लगाए. अपनी कंपनी खड़ी करने में उनको कई साल कड़ी मेहनत करनी पड़ी.

"पहले मैंने सोचा था कि नये सिरे से शुरुआत करना आसान होगा, लेकिन मुझे अहसास हुआ कि कर्ज़ देने वाले उत्सुक नहीं थे क्योंकि पीछे कोई संपत्ति नहीं थी."

"हमने बैंक से एक छोटी रक़म उधार ली और 2002 में हमारा बिज़नेस शुरू हुआ. हमें एकदम शून्य से शुरुआत करनी पड़ी और धीरे-धीरे इसे खड़ा किया."

पेंडरगास्ट के मुताबिक़ वाउड का तजुर्बा अनोखा नहीं है. परिवार का कोई जब सदस्य बिज़नेस छोड़ता है तो भावनाएं ज़ोर मारती हैं. परिवार के लोग इसे निजी तौर पर ले सकते हैं.